एत जा नि’ राहु कैल चन्द्रेर ग्रहण ।
‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ ‘हरि’ नामे भासे त्रिभुवन ॥92॥
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अनुवाद
यह विचार करते हुए, राहु, जो कि काला ग्रह है, ने पूर्णिमा को ढक लिया, और तुरंत ही “कृष्ण! कृष्ण! हरि!” के कंपन ने तीनों लोकों को प्रभावित कर दिया।
Thinking this, the dark planet Rahu covered the full moon and immediately the three worlds resounded with the sound of "Krishna! Krishna! Hari!"
तात्पर्य
ज्योतिष वेद के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब राहु ग्रह पूर्णिमा के सामने आ जाता है। भारत में यह प्रथा है कि वैदिक शास्त्रों के सभी अनुयायी चंद्र या सूर्य ग्रहण होते ही गंगा या समुद्र में नहाते हैं। वैदिक धर्म के सभी कट्टर अनुयायी पूरे ग्रहण काल में पानी में खड़े रहकर हरि कृष्ण महामंत्र का जाप करते हैं। भगवान चैतन्य महाप्रभु के जन्म के समय एक ऐसा ही चंद्र ग्रहण लगा था और स्वाभाविक रूप से पानी में खड़े सभी लोग हरि कृष्ण, हरि कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरि हर / हर राम, हर राम, राम राम, हरि हर का जाप कर रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥