शची कहे , - मुञि देखों आकाश - उपरे ।
दिव्य - मूर्ति लोक सब येन स्तुति करे ॥83॥
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अनुवाद
शचीमाता ने अपने पति से कहा, "मैं बाह्य अंतरिक्ष में अद्भुत प्रतिभाशाली मनुष्यों को प्रकट होते हुए देख रही हूँ, मानो वे प्रार्थना कर रहे हों।"
Shachimata said to her husband, “I see very strange radiant men appearing in the outer sky, as if they are praising.”
तात्पर्य
जगन्नाथ मिश्र की पृथ्वी पर सब लोग पूजा करते थे और उनकी हर ज़रूरत पूरी होती थी। इसी प्रकार माँ शचीदेवी ने देखा कि कई देवता उनके पेट में भगवान चैतन्य महाप्रभु की उपस्थिति के कारण ब्रह्मांड में उनकी पूजा अर्चना कर रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥