तबे पुत्र जनमिला ‘विश्वरूप’ नाम ।
महा - गुणवान् तेह - ‘बलदेव’ - धाम ॥74॥
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अनुवाद
इसके बाद जगन्नाथ मिश्र को विश्वरूप नाम का पुत्र प्राप्त हुआ, जो बलदेव का अवतार होने के कारण अत्यंत शक्तिशाली और गुणवान था।
After this, Jagannatha Mishra got a son named Vishvarupa, who was very powerful and virtuous, because he was the incarnation of Baldev.
तात्पर्य
विश्वरूप, गौरहरी के बड़े भाई थे, भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु। जब विश्वरूप के विवाह की तैयारियाँ की जा रही थीं, तब उन्होंने संन्यास ले लिया और घर छोड़ दिया। उन्होंने संन्यास में शंकरारण्य नाम लिया। 1431 शक संवत (ईस्वी. 1509) में, वे शोलापुर ज़िले के पाँडरपुर में विलुप्त हो गए। सांकर्षण के अवतार के रूप में, वे इस भौतिक संसार के सृजन के घटकी और तात्कालिक कारण दोनों हैं। वे श्री चैतन्य महाप्रभु से भिन्न नहीं हैं, क्योंकि अंश और अंशी, या भाग और पूर्ण, भिन्न नहीं होते हैं। सांकर्षण के अवतार के रूप में, विश्वरूप, चतुर्व्यूह के चतुष्कोणीय अभिव्यक्ति के अंतर्गत आते हैं। गौर-चंद्रोदय में कहा गया है कि विश्वरूप, अपने तथाकथित निधन के बाद, श्री नित्यानंद प्रभु के साथ मिश्रित रहे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥