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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.13.60 
ताँर पत्नी ‘शची’ - नाम, पतिव्रता सती ।
याँर पिता ‘नीलाम्बर’ नाम चक्रवर्ती ॥60॥
 
 
अनुवाद
उनकी पत्नी श्रीमती शचीदेवी एक पतिव्रता स्त्री थीं, जो अपने पति के प्रति अत्यधिक समर्पित थीं। शचीदेवी के पिता का नाम नीलाम्बर था, और उनका उपनाम चक्रवर्ती था।
 
His wife, Shrimati Shachidevi, was a chaste woman and extremely devoted to her husband. Shachidevi's father's name was Nilambar, and their surname was Chakravarti.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर अनुभाष्य में लिखते हैं, "गौरा-गणोद्देश-दीपिका (104) में वर्णन किया गया है कि नीलांबर चक्रवर्ती पहले गर्ग मुनि थे। नीलांबर चक्रवर्ती के कुछ वंशज अभी भी बांग्लादेश के फरीदपुर जिले के मगडोबा गाँव में रहते हैं। उनके भतीजे जगन्नाथ चक्रवर्ती थे, जिन्हें मामू ठाकुर के नाम से भी जाना जाता था, जो पंडित गोस्वामी के शिष्य बने और जगन्नाथ पुरी में टोटा-गोपीनाथ के पुजारी के रूप में रहे। नीलांबर चक्रवर्ती नवद्वीप में, बेलपुकुरिया के पड़ोस में रहते थे। इस तथ्य का उल्लेख प्रेम-विलास पुस्तक में किया गया है। क्योंकि वह काजी के घर के पास रहते थे, इसलिए काजी को भी भगवान चैतन्य महाप्रभु के मामाओं में से एक माना जाता था। काजी नीलांबर चक्रवर्ती को काका या 'चाचा' कहकर संबोधित करते थे। काजी के निवास को वामनपुकुरा से अलग नहीं किया जा सकता है क्योंकि काजी का मकबरा अभी भी वहाँ मौजूद है। पहले उस स्थान को बेलपुकुरिया के नाम से जाना जाता था, और अब इसे वामनपुकुरा कहा जाता है। यह पुरातात्विक प्रमाणों द्वारा पता लगाया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)