श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.13.6 
एइ त’ कहिल ग्रन्थारम्भे मुख - बन्ध ।
एबे कहि चैतन्य - लीला - क्रम - अनुबन्ध ॥6॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने चैतन्य-चरितामृत की प्रस्तावना कही है। अब मैं चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का क्रमानुसार वर्णन करूँगा।
 
Thus I have presented the introduction to the Chaitanya Charitamrita. Now I will describe the pastimes of Chaitanya Mahaprabhu in chronological order.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)