नगरे नगरे भ्रमे कीर्तन करिया ।
भासाइल त्रिभुवन प्रेम - भक्ति दिया ॥32॥
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अनुवाद
संकीर्तन आंदोलन नगर के एक भाग से दूसरे भाग तक चलता रहा, और भगवान कीर्तन करते हुए सर्वत्र विचरण करते रहे। इस प्रकार उन्होंने भगवत्प्रेम का वितरण करके समस्त जगत को आप्लावित कर दिया।
As Mahaprabhu traveled around chanting kirtan, the sankirtan movement spread from one end of the city to the other. Thus, he flooded the entire world with his distribution of divine love.
तात्पर्य
कोई भी यह सवाल उठा सकता है कि तीनों संसार कृष्ण के प्रेम से कैसे अभिभूत हो गए, क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने केवल नवद्वीप क्षेत्र में कीर्तन किया था। उत्तर यह है कि भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं कृष्ण हैं। संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति भगवान के द्वारा पहली बार गति में स्थापित करने से उत्पन्न होती है। इसी प्रकार, चूंकि कीर्तन आंदोलन को सबसे पहले पाँच सौ साल पहले श्री चैतन्य महाप्रभु की इच्छा से गति में स्थापित किया गया था कि यह पूरे ब्रह्मांड में फैले, कृष्ण चेतना आंदोलन, उस गति की निरंतरता में, अब पूरी दुनिया में फैल रहा है, और इस तरह यह धीरे-धीरे पूरे ब्रह्मांड में फैल जाएगा। कृष्ण चेतना आंदोलन के प्रसार के साथ, हर कोई कृष्ण के प्रेम के सागर में विलीन हो जाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥