श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.13.28 
पौगण्ड - वयसे पड़ेन, पड़ान शिष्यगणे ।
सर्वत्र करेन कृष्ण - नामेर व्याख्याने ॥28॥
 
 
अनुवाद
अपने पौगण्ड काल में वे एक गंभीर शिष्य बन गए और शिष्यों को शिक्षा भी दी। इस प्रकार वे सर्वत्र कृष्ण के पवित्र नाम का प्रचार करते थे।
 
As a teenager, he became a serious student and even taught his disciples. Thus, he preached the name of Krishna everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)