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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.13.115 
भक्ष्य, भोज्य, उपहार, सङ्गे लइल बहु भार,
शची - गृहे हैल उपनीत ।
देखिया बालक - ठाम, साक्षात्गोकुल - कान,
वर्ण - मात्र देखि विपरीत ॥115॥
 
 
अनुवाद
जब सीता ठाकुरणी अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ, वस्त्र तथा अन्य उपहार लेकर शचीदेवी के घर आईं, तो नवजात शिशु को देखकर वे आश्चर्यचकित हो गईं, क्योंकि उन्होंने देखा कि रंग में अंतर के अलावा, वह बालक साक्षात गोकुल के कृष्ण थे।
 
When Sita Thakurani came to Saci Devi's house with many eatables, clothes and other gifts, she was astonished to see the newborn baby, because she thought that this baby was actually Krishna of Gokul, the only difference being the colour.
तात्पर्य
एक पेटारी एक प्रकार की बड़ी टोकरी होती है जिसे एक रॉड के सिरों पर कंधों पर संतुलित करके जोड़े में ले जाया जाता है। ऐसे बोझ को उठाने वाले आदमी को भारी कहा जाता है। सामान और पैकेज ले जाने की यह व्यवस्था अभी भी भारत और अन्य प्राच्य देशों में प्रचलित है, और हमने देखा है कि यह व्यवस्था इंडोनेशिया के जकार्ता में भी अभी भी प्रचलित है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)