सावित्री, गौरी, सरस्वती, शची, रम्भा, अरुन्धती
आर यत देव - नारीगण ।
नाना - द्रव्ये पात्र भ रि’, ब्राह्मणीर वेश ध रि’,
आसि’ सबे करे दरशन ॥105॥
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अनुवाद
ब्रह्मा, शिव, नृसिंहदेव, इन्द्र और वसिष्ठ ऋषि की पत्नियाँ तथा स्वर्ग की नर्तकी रम्भा सहित सभी देवियाँ ब्राह्मण पत्नियों का वेश धारण करके नाना प्रकार के उपहार लेकर वहाँ आईं।
All the divine women, including the wives of Brahma, Shiva, Lord Narasimha, King Indra, sage Vasishtha, and the heavenly nymph Rambha, came there disguised as Brahmin women and carrying various gifts.
तात्पर्य
जब भगवान चैतन्य महाप्रभु नवजात शिशु थे, तब पड़ोस की महिलाओं ने उनसे मुलाकात की, जिनमें से अधिकांश प्रतिष्ठित ब्राह्मणों की पत्नियाँ थीं। ब्राह्मणों की पत्नियों के वेश में, भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव की पत्नियों जैसी दिव्य महिलाएँ भी नवजात शिशु को देखने आईं। आम लोग उन्हें पड़ोस की सम्मानित ब्राह्मण महिलाओं के रूप में देखते थे, लेकिन वास्तव में वे सभी दिव्य महिलाएं उसी तरह से सजी थीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥