शाखा - श्रेष्ठ धुवानन्द, श्रीधर ब्रह्मचारी ।
भागवताचार्य, हरिदास ब्रह्मचारी ॥80॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
श्री गदाधर पंडित की प्रमुख शाखाएँ थीं (1) श्री ध्रुवानंद, (2) श्रीधर ब्रह्मचारी, (3) हरिदास ब्रह्मचारी और (4) रघुनाथ भागवत आचार्य।
The main branches of Shri Gadadhara Pandit were (1) Shri Dhuvananda, (2) Shridhar Brahmachari, (3) Haridas Brahmachari and (4) Raghunath Bhagavatacharya.
तात्पर्य
गौर-गणोद्देश-दीपिका के 152 वें पद्य में श्री ध्रुवानंद ब्रह्मचारी को ललिता का अवतार बताया गया है, तथा 194 और 199 वें पद्य में श्रीधर ब्रह्मचारी को चंद्रलतिका नामक गोपी बताया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥