श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.12.74 
सेइ सेइ , - आचार्येर कृपार भाजन ।
अनायासे पाइल सेइ चैतन्य - चरण ॥74॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य की कृपा से, जिन भक्तों ने चैतन्य महाप्रभु के मार्ग का दृढ़तापूर्वक पालन किया, उन्हें बिना किसी कठिनाई के भगवान चैतन्य के चरणकमलों की शरण प्राप्त हुई।
 
By the grace of Advaita Acharya, those devotees who firmly followed the path of Chaitanya Mahaprabhu easily attained the shelter of the lotus feet of Chaitanya Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)