Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.12.70 
चैतन्य - रहित देह - शुष्ककाष्ठ - सम ।
जीवितेइ मृत सेइ, मैले दण्डे यम ॥70॥
 
 
अनुवाद
कृष्णभावनामृत से रहित व्यक्ति सूखी लकड़ी या मृत शरीर के समान ही है। वह जीवित रहते हुए भी मृत माना जाता है और मृत्यु के पश्चात् यमराज द्वारा दण्डित किया जाता है।
 
A person without Krishna consciousness is no better than dry wood or a dead body. He is considered dead even while alive, and after death he is punished by Yamaraja.
तात्पर्य
श्रीमद-भागवतम के छठे काण्ड, तीसरे अध्याय, उन्तीसवें श्लोक में, मृत्यु के अधीक्षक यमराज अपने सहायकों को बताते हैं कि उन्हें किस श्रेणी के लोगों को अपने समक्ष लाना चाहिए। वहाँ वे कहते हैं, "जो व्यक्ति अपनी जीभ से कभी भगवान के गुणों और पवित्र नाम का वर्णन नहीं करता, जिसका हृदय कृष्ण और उनके कमल चरणों का स्मरण करते हुए कभी नहीं धड़कता, और जिसका सिर कभी सर्वोच्च प्रभु को नमन में नहीं झुकता है, उसे मुझे दंड के लिए लाया जाना चाहिए।" दूसरे शब्दों में, अधर्मी लोगों को दण्ड के लिए यमराज के समक्ष लाया जाता है, और इस प्रकार भौतिक प्रकृति उन्हें विभिन्न प्रकार के शरीर प्रदान करती है। मृत्यु के बाद, जो शरीर का अन्त होता है, एक शरीर से दूसरे शरीर में परिवर्तन, अधर्मियों को न्याय के लिए यमराज के सामने लाया जाता है। यमराज के निर्णय से, भौतिक प्रकृति उन्हें उनकी पिछली गतिविधियों की प्रतिक्रियाओं के लिए उपयुक्त शरीर देती है। यह शरीर, या एक शरीर से दूसरे शरीर में आत्मा के स्थानांतरण की प्रक्रिया है। हालाँकि, कृष्ण भक्त यमराज द्वारा आंके जाने के अधीन नहीं हैं। भक्तों के लिए एक खुली राह है, जैसा कि भगवद्गीता में पुष्टि की गई है। शरीर त्यागने के बाद (त्यक्त्वा देहम), एक भक्त को फिर कभी दूसरा भौतिक शरीर स्वीकार नहीं करना पड़ता है, क्योंकि एक आध्यात्मिक शरीर में वे घर वापस जाते हैं, भगवान के पास वापस जाते हैं। यमराज की सजा उन लोगों के लिए है जो कृष्ण भक्त नहीं हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)