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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 7
श्लोक
1.12.7
सेइ जल स्कन्धे करे शाखाते सञ्चार ।
फले - फुले बाड़े, - शाखा हइल विस्तार ॥7॥
अनुवाद
जैसे ही तने और शाखाओं को पानी दिया गया, शाखाएं और उपशाखाएं खूब फैल गईं, और पेड़ फलों और फूलों से भर गया।
As the trunk and branches were watered, the branches and sub-branches grew in abundance and the tree became laden with fruits and flowers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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