श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.12.69 
क्रुद्ध हञा स्कन्ध तारे जल ना सञ्चारे ।
जलाभावे कृश शाखा शुकाइया मरे ॥69॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान चैतन्य ने उन पर अपनी दया का जल नहीं छिड़का, और वे धीरे-धीरे मुरझाकर मर गये।
 
Thus Chaitanya Mahaprabhu did not sprinkle the water of his grace on them and gradually they withered and died.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)