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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.12.58 
भागवताचार्य, आर विष्णुदासाचार्य ।
चक्रपाणि आचार्य, आर अनन्त आचार्य ॥58॥
 
 
अनुवाद
भागवत आचार्य, विष्णुदास आचार्य, चक्रपाणि आचार्य और अनंत आचार्य अद्वैत आचार्य की छठी, सातवीं, आठवीं और नौवीं शाखाएँ थीं।
 
Bhagavata Acharya, Vishnudas Acharya, Chakrapani Acharya and Ananta Advaita Acharya were the sixth, seventh, eighth and ninth branches respectively.
तात्पर्य
अपने अनुभाष्य में श्री भक्तिसिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद कहते हैं कि भागवत आचार्य पहले अद्वैत आचार्य के अनुयायियों में से थे लेकिन बाद में उन्हें गदाधर पंडित के अनुयायियों में गिना गया। यदुनंदन दास द्वारा लिखी गई पुस्तक शाखा-निर्णयामृत के छठे छंद में कहा गया है कि भागवत आचार्य ने प्रेम-तरंगिणी नामक एक प्रसिद्ध पुस्तक संकलित की थी। गौरा-गणोद्देश-दीपिका (195) के अनुसार, भागवत आचार्य पहले वृंदावन में श्वेता-मंजरी के रूप में रहते थे। Khetari-mahotsava के दौरान विष्णुदास आचार्य उपस्थित थे। भक्ति-रत्नाकर, दसवें तरंग में कहे अनुसार, वह अच्युतानंद के साथ वहां गए थे। अनंत आचार्य आठ प्रमुख गोपियों में से एक थे। उनका पूर्व नाम सुदेवी था। हालाँकि वह अद्वैत आचार्य के अनुयायियों में से थे, लेकिन बाद में वह गदाधर गोस्वामी के एक महत्वपूर्ण भक्त बन गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)