श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.12.39 
पूर्वे महाप्रभु मोरे करेन सम्मान ।
दुःख पाइ’ मने आमि कैलुँ अनुमान ॥39॥
 
 
अनुवाद
"पहले भगवान चैतन्य महाप्रभु मुझे सदैव अपना वरिष्ठ मानकर आदर करते थे, किन्तु मुझे ऐसा आदर पसंद नहीं था। अतः दुःख से ग्रस्त होकर मैंने एक योजना बनाई।
 
"At first, Chaitanya Mahaprabhu respected me as his superior, but I didn't like such respect. So, because my heart was hurt, I devised a plan."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)