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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.12.36 
गोविन्देरे आज्ञा दिल , - “इँहा आजि हैते ।
बाउलिया विश्वासे एथा ना दिबे आसिते” ॥36॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने गोविन्द को आदेश दिया, “आज से उस बौलिया कमलाकांत विश्वास को यहाँ आने की अनुमति मत देना।”
 
Mahaprabhu ordered Govind, “From today onwards, do not let that fool Kamalakant Vishwas come here.”
तात्पर्य
बाऊलिया या बाऊल, तेरा नानाधिकृत संप्रदायों में से एक है जो चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी माने जाते हैं। प्रभु ने अपने निजी सहायक गोविंद को आदेश दिया कि वह कमलाकांता विश्वास को अपनी उपस्थिति में आने न दें क्योंकि वह एक बाऊलिया बन गया था। इसलिए यद्यपि बाऊल-सम्प्रदाय, औल-सम्प्रदाय और सहजिया-सम्प्रदाय, साथ ही स्मार्त, जात-गोसाईं, अतिवादी, चूड़ादारी और गौरांग-नागरी, चैतन्य महाप्रभु के शिष्य-परंपरा से संबंधित होने का दावा करते हैं, परंतु प्रभु ने वास्तव में उन्हें अस्वीकार कर दिया था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)