श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.12.2 
जय जय महाप्रभु श्री - कृष्ण - चैतन्य ।
जय जय नित्यानन्द जयाद्वैत धन्य ॥2॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की जय हो! भगवान नित्यानंद की जय हो! श्री अद्वैत प्रभु की जय हो! वे सभी महिमावान हैं।
 
Glory to Sri Chaitanya Mahaprabhu! Glory to Nityananda Prabhu, and glory to Sri Advaita Prabhu! Blessed are they all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)