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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.12.19 
श्री - गोपाल - नामे आर आचार्गेर सुत ।
ताँहार चरित्र, शुन, अत्यन्त अद्भुत ॥19॥
 
 
अनुवाद
श्री गोपाल श्री अद्वैत आचार्य प्रभु के एक और पुत्र थे। अब उनकी विशेषताओं के बारे में सुनिए, क्योंकि वे सभी अत्यंत अद्भुत हैं।
 
Sri Advaita Acharya Prabhu's other son was Sri Gopal. Now listen to his characteristics, for they are all quite remarkable.
तात्पर्य
जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, श्री गोपाल, अद्वैत आचार्य के तीन समर्पित पुत्रों में से एक थे। आगे चैतन्य-चरितामृत के मध्य-लीला में, अध्याय बारह, 143 से 149 तक के पाठों में उनका वर्णन किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)