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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.12.18 
कृष्ण - मिश्र - नाम आर आचार्य - तनय ।
चैतन्य - गोसाञि बैसे याँहार हृदय ॥18॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण मिश्र अद्वैत आचार्य के पुत्र थे। भगवान चैतन्य महाप्रभु सदैव उनके हृदय में विराजमान रहते थे।
 
Krishna Mishra was the son of Advaita Acharya. Sri Chaitanya Mahaprabhu was always present in his heart.
तात्पर्य
आडवाइट आचार्य के छह पुत्रों में से तीन, अच्युतानंद, कृष्ण मिश्र और गोपाल दास, चैतन्य महाप्रभु की सेवा में निष्ठापूर्वक लगे रहे। चूंकि अच्युतानंद ने पत्नी स्वीकार नहीं की थी, इसलिए उनके कोई संतान नहीं हुई। आडवाइट आचार्य के दूसरे पुत्र, कृष्ण मिश्र, के दो पुत्र थे, रघुनाथ चक्रवर्ती और डोला-गोविंद। रघुनाथ के वंशज अभी भी शांतिपुर में, मधु-गोपाल-पाड़ा, गणकर, मृजापुर और कुमारखाली के पड़ोस में रहते हैं। डोला-गोविंद के तीन पुत्र थे, जैसे चांडा, कंदर्प और गोपीनाथ। कंदर्प के वंशज मालदा में, जिकबाड़ी गांव में रहते हैं। गोपीनाथ के तीन पुत्र थे, श्रीवल्लभ, प्राणवल्लभ और केशव। श्रीवल्लभ के वंशज मसियाडाड़ा (महिषाडेरा), दामुकडिया और चंडीपुरा नामक गांवों में रहते हैं। श्रीवल्लभ के परिवार के लिए एक वंशावली सारणी है जो उनके सबसे बड़े पुत्र, गंगा-नारायण से शुरू होती है। श्रीवल्लभ के सबसे छोटे पुत्र रामागोपाल के वंशज अभी भी दामुकडिया, चंडीपुरा, शोलामारी आदि में रहते हैं। प्राणवल्लभ और केशव के वंशज उथली में रहते हैं। प्राणवल्लभ का पुत्र रत्नेश्वर था, और उनका पुत्र कृष्णराम था, जिनका सबसे छोटा पुत्र लक्ष्मी-नारायण था। उनका पुत्र नवकीशोर था, और नवकीशोर का दूसरा पुत्र राममोहन था, जिसका सबसे बड़ा पुत्र जगबंधु था और जिसका तीसरा पुत्र, वीरचंद्र ने संन्यास का व्रत लिया और कटवा में भगवान चैतन्य महाप्रभु की मूर्ति स्थापित की। राममोहन के इन दो पुत्रों को बाड़ा प्रभु और छोटा प्रभु के नाम से जाना जाता था, और उन्होंने नवद्वीप-धाम की परिक्रमा का उद्घाटन किया। कृष्ण मिश्र की वंशावली में आडवाइट प्रभु की पूरी वंशावली के लिए वैष्णव-मंजूषा का उल्लेख किया जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)