आचार्गेर मत येइ, सेइ मत सार ।
ताँर आज्ञा लङ्घि’ चले, सेइ त’ असार ॥10॥
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अनुवाद
आध्यात्मिक जीवन में गुरु का आदेश ही सक्रिय सिद्धांत है। जो कोई गुरु के आदेश का उल्लंघन करता है, वह तुरंत ही बेकार हो जाता है।
In spiritual life, the Guru's command is the living principle. Anyone who disobeys the Guru's command immediately becomes worthless (asar).
तात्पर्य
यहाँ श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी का मत दिया गया है। जो लोग आध्यात्मिक गुरु के आदेशों का सख्ती से पालन करते हैं, वे परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने में उपयोगी होते हैं, जबकि जो लोग आध्यात्मिक गुरु के सख्त आदेश से विचलित होते हैं, वे बेकार हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥