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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.11.8 
श्री - वीरभद्र गोसाञि स्कन्ध - महाशाखा ।
ताँर उपशाखा व्रत, असङ्ख्य तार लेखा ॥8॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु के बाद सबसे बड़ी शाखा वीरभद्र गोसाणी हैं, जिनकी भी असंख्य शाखाएँ और उपशाखाएँ हैं। उन सभी का वर्णन करना संभव नहीं है।
 
After Nityananda Prabhu, the largest branch is that of Virbhadra Gosain, who also has numerous branches and sub-branches. It is impossible to describe them all.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर अपने अनुभाष्य में लिखते हैं, "वीरभद्र गोसाँई श्रील नित्यानंद प्रभु के प्रत्यक्ष पुत्र और जाह्नवी-देवी के शिष्य थे। उनकी असली माँ वसुधा थी। गौर-गणोद्देश-दीपिका (67) में उन्हें क्षीरोंदकशायी विष्णु का अवतार बताया गया है। इसलिए वीरभद्र गोसाँई श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु से भिन्न नहीं हैं। हुगली जिले के झामाटापुर गाँव में, वीरभद्र गोसाँई का यदुनाथाचार्य नाम का एक शिष्य था, जिसकी दो पुत्रियाँ थीं - एक असली बेटी का नाम श्रीमती और एक पालक बेटी का नाम नारायणी था। ये दोनों बेटियाँ विवाहित हो गई थीं, और उनका उल्लेख भक्ति-रत्नाकर (तीरहवीं लहर) में किया गया है। वीरभद्र गोसाँई के तीन शिष्य थे जिन्हें उनके पुत्र के रूप में मनाया जाता है - गोपीजन-वल्लभ, रामकृष्ण और रामचंद्र। सबसे छोटा, रामचंद्र, शांडिल्य वंश से संबंधित था और उसका उपनाम वटव्याल था। उसने खडादहा में अपने परिवार की स्थापना की, और उसके सदस्यों को खडादहा के गोस्वामियों के रूप में जाना जाता है। सबसे बड़े शिष्य, गोपीजन-वल्लभ, लता नामक गाँव का निवासी था, जो बर्दवान जिले में मानकर रेलवे स्टेशन के पास था। दूसरा, रामकृष्ण, गाँव गायशपुर में मलादहा के पास रहता था।" श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर बताते हैं कि चूंकि ये तीनों शिष्य अलग-अलग गोत्रों या वंशों के थे, और उनके अलग-अलग उपनाम भी थे और वे अलग-अलग जगहों पर रहते थे, इसलिए उन्हें वीरभद्र गोसाँई के असली पुत्र के रूप में स्वीकार करना संभव नहीं है। रामचंद्र के चार पुत्र थे, जिनमें से सबसे बड़े राधामधव थे, जिनके तीसरे पुत्र का नाम यादवेंद्र था। यादवेंद्र के पुत्र नंदकिशोर थे, उनका पुत्र निधिकृष्ण था, उनका पुत्र चैतन्यचांड था, उनका पुत्र कृष्णमोहन था, उनका पुत्र जगनमोहन था, उनका पुत्र व्रजनाथ था, और उनका पुत्र श्यामलाल गोस्वामी था। यह वीरभद्र गोसाँई के वंशजों के लिए भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर द्वारा दी गई वंशावली तालिका है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)