श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.11.60 
सङ्क्षेपे कहिलाँ एइ नित्यानन्द - गण ।
याँहार अवधि ना पाय ‘सहस्र - वदन’ ॥60॥
 
 
अनुवाद
मैंने भगवान नित्यानंद प्रभु के कुछ अनुयायियों और भक्तों का ही संक्षेप में वर्णन किया है। हज़ार मुख वाला शेषनाग भी इन सभी असीमित भक्तों का वर्णन नहीं कर सकता।
 
I have briefly described only some of the followers and devotees of Sri Nityananda Prabhu.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas