श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.11.6 
मालाकारेर इच्छा जले बाड़े शाखा - गण ।
प्रेम - फुल - फले भरि’ छाइल भुवन ॥6॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की इच्छा से सींचकर ये शाखाएँ और उपशाखाएँ असीमित रूप से बढ़ी हैं और सम्पूर्ण जगत को फलों और फूलों से आच्छादित कर दिया है।
 
Watered by the will of Sri Chaitanya Mahaprabhu, all these branches and sub-branches have grown infinitely, and have covered the entire universe with their fruits and flowers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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