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श्लोक 1.11.54  |
वृन्दावन - दास - नारायणीर नन्दन ।
‘चैतन्य - मङ्गल’ येंहो करिल रचन ॥54॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीमती नारायणी के पुत्र वृन्दावन दास ठाकुर ने श्री चैतन्य-मंगल [जिसे बाद में श्री चैतन्य-भागवत के नाम से जाना गया] की रचना की। |
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| Srimati Narayani's son Vrindavan Das Thakur composed Sri Chaitanya Mangal (which later became famous as Sri Chaitanya Bhagavata). |
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