गोविंद कविराज रामचंद्र कविराज के भाई और श्रीखंड के चिरंजीवा के सबसे छोटे पुत्र थे। हालाँकि पहले एक शाक्त, या देवी दुर्गा के उपासक, उन्हें बाद में श्रीनिवास आचार्य प्रभु द्वारा दीक्षित किया गया। गोविंद कविराज भी पहले श्रीखंड में और फिर कुमार-नगर में रहते थे, लेकिन बाद में वह पद्मा नदी के दक्षिणी तट पर तेलीया बुधारी नामक गांव में चले गए। चूँकि गोविंद कविराज, संगीता-माधव और गीतामृत नामक दो पुस्तकों के लेखक, एक महान वैष्णव कवि थे, श्रील जीवा गोस्वामी ने उन्हें कविराज की उपाधि दी। उनका वर्णन भक्तिरत्नाकर (नौवीं लहर) में मिलता है।
कमसारी सेना पहले गौर-गणोद्देश-दीपिका (194 और 200) में वर्णित अनुसार, व्रज में रत्नावली थी।
