श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.11.49 
श्रीमन्त, गोकुल - दास हरिहरानन्द ।
शिवाइ, नन्दाइ, अवधूत परमानन्द ॥49॥
 
 
अनुवाद
श्रीमंत पैंतालीसवें, गोकुलदास छियालीसवें, हरिहरानंद सैंतालीसवें, शिवाई अड़तालीसवें, नंदाई उनचासवें और परमानंद पचासवें थे।
 
Shrimant was the forty-fifth devotee, Gokuldas was the forty-sixth, Hariharanand was the forty-seventh, Shivai was the forty-eighth, Nandai was the forty-ninth and Paramananda was the fiftieth devotee.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd