| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार » श्लोक 48 |
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| | | | श्लोक 1.11.48  | नकड़ि, मुकुन्द, सूर्य, माधव, श्रीधर ।
रामानन्द वसु, जगन्नाथ, महीधर ॥48॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान नित्यानंद के भक्तों में नकादि सैंतीसवें, मुकुंद अड़तीसवें, सूर्य उनतीसवें, माधव चालीसवें, श्रीधर इकतालीसवें, रामानंद बयालीसवें, जगन्नाथ तैंतालीसवें और महीधर चौवालीसवें थे। | | | | Among the devotees of Nityananda Prabhu, Nakadi was thirty-seventh, Mukunda thirty-eighth, Surya forty-ninth, Madhava fortieth, Sridhar forty-first, Ramanand forty-two, Jagannath forty-third and Mahidhar forty-fourth. | | ✨ ai-generated | | |
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