श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.11.42 
आचा र्य वैष्णवानन्द भक्ति - अधिकारी ।
पूर्वे नाम छिल याँर रघुनाथ पुरी’ ॥42॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु के सत्ताईसवें प्रमुख भक्त आचार्य वैष्णवानंद थे, जो भक्ति सेवा में एक महान व्यक्तित्व थे। उन्हें पहले रघुनाथ पुरी के नाम से जाना जाता था।
 
The twenty-seventh chief devotee of Nityananda Prabhu was Acharya Vaishnavananda, a great authority on devotional service. He was formerly known as Raghunath Puri.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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