श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.11.39 
आजन्म निमग्न नित्यानन्देर चरणे ।
निरन्तर बाल्य - लीला करे कृष्ण - सने ॥39॥
 
 
अनुवाद
जन्म से ही पुरुषोत्तम दास भगवान नित्यानंद प्रभु के चरणकमलों की सेवा में लीन रहते थे और सदैव भगवान कृष्ण के साथ बाल-क्रीड़ा में लीन रहते थे।
 
From birth, Purushottam Das Nityananda was immersed in the service of the Lord's lotus feet and was always engaged in childlike play with Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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