vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार
»
श्लोक 38
श्लोक
1.11.38
श्री - सदाशिव कविराज - बड़ महाशय ।
श्री - पुरुषोत्तम - दास - ताँहार तन य ॥38॥
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु के तेईसवें और चौबीसवें प्रमुख भक्त सदाशिव कविराज और उनके पुत्र पुरुषोत्तम दास थे, जो दसवें गोपाल थे।
The twenty-third and twenty-fourth devotees of Shri Nityananda Prabhu were Sadashiv Kaviraj and his son Purushottamdas, who was the tenth Gopal.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×