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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.11.37 
काला - कृष्णदास बड़ वैष्णव - प्रधान ।
नित्यानन्द - चन्द्र विनु नहि जाने आन ॥37॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद प्रभु के बाईसवें भक्त काल कृष्णदास थे, जो नौवें ग्वालबाल थे। वे एक उच्च कोटि के वैष्णव थे और नित्यानंद प्रभु से आगे कुछ नहीं जानते थे।
 
Nityananda Prabhu's twenty-second devotee was Kala Krishnadas, the ninth Gopala. He was a first-class Vaishnava and knew no one except Nityananda Prabhu.
तात्पर्य
गौरा-गणोद्देश-दीपिका ( 132 ) में कहा गया है कि काला कृष्णदास, जो कालीय कृष्णदास के रूप में भी जाने जाते थे, एक समय लवंगा नामक एक गोप (ग्वाला लड़का) थे। वह बारह ग्वाला लड़कों में से एक थे।

श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर अपने अनुभाष्य में लिखते हैं, ' कालीय कृष्णदास का मुख्यालय आकैहाट नामक एक गाँव था। यह कटवा डाकघर और पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के भीतर बर्दवान जिले में स्थित है। यह नवद्वीप के लिए जाने वाले रास्ते पर स्थित है। आकैहाट पहुँचने के लिए, किसी को बांडेल जंक्शन स्टेशन से कटवा रेलवे स्टेशन तक जाना होगा और फिर लगभग दो मील आगे जाना होगा, या किसी को दानीहाट स्टेशन पर उतरना होगा और वहां से एक मील पैदल चलना होगा। आकैहाट गाँव बहुत छोटा है। वैशाख माह में, वारणी के दिन, काला कृष्णदास के प्रकट दिवस को याद करने के लिए एक उत्सव होता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)