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अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार
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श्लोक 36
श्लोक
1.11.36
राढ़े याँर जन्म कृष्णदास द्विजवर ।
श्री - नित्यानन्देर तेंहो परम कि ङ्कर ॥36॥
अनुवाद
बंगाल में श्री नित्यानंद के इक्कीसवें भक्त कृष्णदास ब्राह्मण थे, जो भगवान के प्रथम श्रेणी के सेवक थे।
The twenty-first devotee of Sri Nityananda in Bengal was Krishnadas Brahmin, who was a high-ranking servant of Nityananda Prabhu.
तात्पर्य
इस श्लोक में राधे शब्द राढ़ देश के लिए प्रयुक्त है जहां गंगा का बहना नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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