श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.11.35 
महा - भागवत यदुनाथ कविचन्द्र ।
याँहार हृदये नृत्य करे नित्यानन्द ॥35॥
 
 
अनुवाद
यदुनाथ कविचन्द्र एक महान भक्त थे। भगवान नित्यानंद प्रभु सदैव उनके हृदय में नृत्य करते रहते थे।
 
Yadunath Kavichandra was a great devotee. Shri Nityananda Prabhu danced continuously in his heart.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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