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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.11.35 
महा - भागवत यदुनाथ कविचन्द्र ।
याँहार हृदये नृत्य करे नित्यानन्द ॥35॥
 
 
अनुवाद
यदुनाथ कविचन्द्र एक महान भक्त थे। भगवान नित्यानंद प्रभु सदैव उनके हृदय में नृत्य करते रहते थे।
 
Yadunath Kavichandra was a great devotee. Shri Nityananda Prabhu danced continuously in his heart.
तात्पर्य
चैतन्य-भागवत मध्य-खंड, अध्याय एक में कहा गया है कि रत्नगर्भ आचार्य नामक एक सज्जन श्री चैतन्य महाप्रभु के पिता के मित्र थे। वे एक ही गाँव के निवासी थे। रत्नगर्भ आचार्य के तीन पुत्र थे - कृष्णानंद, जीव और यदुनाथ कविचंद्र।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)