Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.11.32 
महेश पण्डित - व्रजेर उदार गोपाल ।
ढक्का - वाद्ये नृत्य करे प्रेमे मातोयाल ॥32॥
 
 
अनुवाद
बारह गोपालों में से सातवें, महेश पंडित, बहुत उदार थे। कृष्ण के प्रेम में वे उन्मत्त होकर ढोल की थाप पर पागलों की तरह नाचते थे।
 
Mahesh Pandit was the seventh of the twelve Gopalas. He was extremely generous. He would dance wildly in love with Krishna to the sound of the dhakka (drum).
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर अपने अनुभाष्य में लिखते हैं , “महेश पंडित का गांव, जो पालापाड़ा के नाम से जाना जाता है , नादिया ज़िले के एक जंगल में चाकड़ा रेलवे स्टेशन के एक मील दक्षिण में स्थित है । इसके पास भागीरथी बहती है । ऐसा कहा जाता है कि पहले महेश पंडित जिरात के पूर्वी हिस्से में रहते थे जिसे मसिपुर या यशिपुर कहा जाता है , और जब मसिपुर गंगा नदी के पेट में चला गया तो वहाँ के देवता पालापाड़ा ले जाए गए , जो कई गांवों के बीच में स्थित है जैसे बेलड़ांगा , बेरिग्राम , सुखसागर , चांदुडे और मनसापोता । (कुल चौदह गांव हैं और पड़ोस को पाँचनगर परगना कहा जाता है ।) कहा जाता है कि महेश पंडित पाणिहाटी में श्री नित्यानंद प्रभु के त्यौहार में शामिल हुए थे । नरहरि दास ठाकुर भी त्यौहार में शामिल हुए थे और उस समय महेश पंडित ने उन्हें देखा था । महेश पंडित के मंदिर में गौर-नित्यानंद , श्री गोपीनाथ , श्री मदनमोहन और राधा-गोविंद की देव मूर्तियां हैं और एक शालिग्राम-शिला भी है ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)