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अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार
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श्लोक 3
श्लोक
1.11.3
जय जय श्री - अद्वैत, जय नित्यानन्द ।
जय जय महाप्रभुर सर्व - भक्त - वृन्द ॥3॥
अनुवाद
श्री अद्वैत प्रभु, नित्यानंद प्रभु और भगवान चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों की जय!
Victory to all the devotees of Sri Advaita Prabhu, Nityananda Prabhu and Sri Chaitanya Mahaprabhu!
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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