"परमेश्वरी ठाकुर, ऐसा कहा जाता है, वैद्य परिवार से थे। उनके भाई के वंशज वर्तमान में मंदिर में पूजा करते हैं। उनके कुछ परिवार के सदस्य अभी भी हुगली जिले में, चंडीतला के डाकघर के पास रहते हैं। परमेश्वरी ठाकुर के वंशजों ने ब्राह्मण परिवारों से कई शिष्य ग्रहण किए, लेकिन जैसे-जैसे ये वंशज धीरे-धीरे चिकित्सकों के पेशे में चले गए, ब्राह्मण परिवारों के लोग उनके शिष्य बनना बंद हो गए। परमेश्वरी के वंशजों की पारिवारिक उपाधियाँ अधिकारी और गुप्ता हैं। दुर्भाग्य से, उनके परिवार के सदस्य सीधे देवता की पूजा नहीं करते हैं; उन्होंने देवता की पूजा के लिए वेतनभोगी ब्राह्मणों को नियुक्त किया है। मंदिर में, बलदेव और श्री श्री राधा-गोपीनाथ एक साथ सिंहासन पर विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान बलदेव की मूर्ति बाद में स्थापित की गई थी क्योंकि दिव्य भाव के अनुसार, बलदेव, कृष्ण और राधा एक ही सिंहासन पर नहीं रह सकते। वैशाख (अप्रैल-मई) के पूर्णिमा के दिन, इस मंदिर में परमेश्वरी ठाकुर के प्रकटोत्सव को मनाया जाता है।
