श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.11.28 
नित्यानन्द प्रभुर प्रिय - पण्डित पुरन्दर ।
प्रेमार्णव - मध्ये फिरे यैछन मन्दर ॥28॥
 
 
अनुवाद
श्री नित्यानंद प्रभु के तेरहवें महत्वपूर्ण भक्त पंडित पुरंदर थे, जो भगवान के प्रेम के सागर में मंदार पर्वत की तरह विचरण करते थे।
 
The thirteenth chief devotee of Shri Nityananda Prabhu was Pandit Purandar. He walked in the ocean of love for God as if he were a mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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