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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.11.25 
सूर्यदास सरखेल, ताँर भाइ कृष्णदास ।
नित्यानन्दे दृढ़ विश्वास, प्रेमेर निवास ॥25॥
 
 
अनुवाद
सूर्यदास सरखेल और उनके छोटे भाई कृष्णदास सरखेल, दोनों नित्यानंद प्रभु में दृढ़ विश्वास रखते थे। वे भगवान के प्रेम के भंडार थे।
 
Suryadas Sarkhel and his younger brother Krishnadas Sarkhel had strong faith in Nityananda Prabhu. They were both reservoirs of love for God.
तात्पर्य
भक्ति-रत्नाकर (12वां तरंग) में कहा गया है कि नवद्वीप से कुछ मील की दूरी पर शालीग्राम नामक स्थान है। वह सूर्यदास सरखेल का निवास स्थान था। उस समय वह मुस्लिम सरकार में सचिव के तौर पर कार्यरत था और इस तरह वह अच्छा धन इकट्ठा कर पाया। सूर्यदास के चार भाई थे, जिनमें सभी शुद्ध वैष्णव थे। वसुधा और जाह्नवी सूर्यदास सरखेल की दो बेटियाँ थीं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)