श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.11.20 
मुरारि - चैतन्य - दासेर अलौकिक लीला ।
व्याघ्र - गाले चड़ मारे, सर्प - सने खेला ॥20॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य महाप्रभु के परम भक्त मुरारी ने अनेक असाधारण कार्य किए। कभी वे आनंद में बाघ के गाल पर थप्पड़ मारते, तो कभी विषैले साँप के साथ खेलते।
 
Murari, a great devotee of Sri Chaitanya Mahaprabhu, performed many supernatural feats. Sometimes, in a fit of ecstasy, he would slap a tiger on the face and sometimes play with a poisonous snake.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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