vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार
»
श्लोक 17
श्लोक
1.11.17
गदाधर दास गोपीभावे पूर्णानन्द ।
याँर घरे दानकेलि कैल नित्यानन्द ॥17॥
अनुवाद
श्रील गदाधर दास गोपी के रूप में सदैव परमानंद में लीन रहते थे। उनके घर में भगवान नित्यानंद ने दानकेलि नाटक का मंचन किया था।
Srila Gadadhara Dasa was always absorbed in the Gopi Bhava. Lord Nityananda enacted the Danakali drama in his home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×