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श्लोक 1.11.17  |
गदाधर दास गोपीभावे पूर्णानन्द ।
याँर घरे दानकेलि कैल नित्यानन्द ॥17॥ |
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| अनुवाद |
| श्रील गदाधर दास गोपी के रूप में सदैव परमानंद में लीन रहते थे। उनके घर में भगवान नित्यानंद ने दानकेलि नाटक का मंचन किया था। |
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| Srila Gadadhara Dasa was always absorbed in the Gopi Bhava. Lord Nityananda enacted the Danakali drama in his home. |
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