नित्यानन्दे आज्ञा दिल यबे गौड़े याइते ।
महाप्रभु एइ दुइ दिला ताँर साथे ॥14॥
अतएव दुइ - गणे दुँहार गणन ।
माधव - वासुदेव घोषेरओ एइ विवरण ॥15॥
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अनुवाद
जब नित्यानंद प्रभु को बंगाल में प्रचार करने का आदेश मिला, तो इन दोनों भक्तों [श्री रामदास और गदाधर दास] को भी उनके साथ जाने का आदेश दिया गया। इस प्रकार, वे कभी भगवान चैतन्य के भक्तों में गिने जाते हैं, तो कभी भगवान नित्यानंद के भक्तों में। इसी प्रकार, माधव घोष और वासुदेव घोष भी एक साथ दोनों भक्त समूहों से संबंधित थे।
When Nityananda Prabhu was ordered to go to Bengal to preach, these two devotees (Sri Ramdas and Gadadhara Das) were ordered to accompany him. Therefore, they are sometimes counted as devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu and sometimes as devotees of Nityananda Prabhu. Similarly, Madhava Ghosh and Vasudeva Ghosh also belonged to both groups of devotees simultaneously.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने अपनी अनुभाष्य में लिखा है, “बुर्दवान जिले में आगाद्वीप रेलवे स्टेशन और पाटुली के पास दाँहिहाटा नामक एक स्थान है, जहां श्री गोपीनाथजी की देवता अभी भी स्थित है। इस देवता ने गोविंद घोष को अपने पिता के रूप में स्वीकार किया था। आज भी, देवता गोविंद घोष की मृत्यु तिथि की बरसी पर श्राद्ध समारोह करते हैं। इस देवता का मंदिर कृष्णानगर के राजा-वंश परिवार द्वारा प्रबंधित किया जाता है, जिनके सदस्य राजा कृष्णचंद्र के वंशज हैं। हर साल वैशाख के महीने में, जब बारादोला समारोह होता है, इस गोपीनाथ देवता को कृष्णानगर ले जाया जाता है। समारोह ग्यारह अन्य देवताओं के साथ किया जाता है, और फिर श्री गोपीनाथजी को आगाद्वीप के मंदिर में वापस लाया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥