श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.10.88 
दुई शाखार प्रेम - फले सकल भासिल ।
प्रेम - फलास्वादे लोक उन्मत्त हइल ॥88॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों शाखाओं पर फलित हुए भगवद्प्रेम के फल बहुतायत से वितरित हुए। इन फलों को चखकर सभी लोग इनके पीछे पागल हो गए।
 
The fruits of divine love that grew on both these branches were distributed in large numbers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)