श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.10.83 
कुलीनग्रामीर भाग्य कहने ना याय ।
शूकर चराय डोम, सेह कृष्ण गाय ॥83॥
 
 
अनुवाद
"कुलीन-ग्राम की सौभाग्यशाली स्थिति का वर्णन कोई नहीं कर सकता। यह इतनी उत्कृष्ट है कि वहाँ सूअर चराने वाले सफाईकर्मी भी हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करते हैं।"
 
"The good fortune of the noble village is beyond description. It is so divine that even the sweepers chant the Hare Krishna mantra while tending the pigs."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)