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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.10.8 
श्रीवास पण्डित, आर श्री - राम पण्डित ।
दुइ भाइ - दुइ शाखा, जगते विदित ॥8॥
 
 
अनुवाद
श्रीवास पंडित और श्री राम पंडित दो भाइयों ने दो शाखाएं शुरू कीं जो दुनिया में सुप्रसिद्ध हैं।
 
Shrivas Pandit and Shriram Pandit - two branches started from these two brothers, which are well known in the world.
तात्पर्य
गौर-गणोद्देश-दीपिका (90) में श्रीवास पण्डित (श्रीवास ठाकुर) को नारद मुनि का अवतार और उनके छोटे भाई श्री राम पण्डित को नारद के बड़े सहयोगी पर्वत मुनि का अवतार बताया गया है। श्रीवास पण्डित की पत्नी मालिनी को माता अम्बिका का अवतार माना गया है जिसने भगवान कृष्ण को अपना दूध पिलाया था, और जैसा कि पहले उल्लेख किया जा चुका है, उनकी भतीजी नारायणी, श्री चैतन्य-भागवत के लेखक ठाकुर वृंदावन दास की माँ, कृष्ण-लीला में अम्बिका की बहन थीं। हम श्री चैतन्य-भागवत के वर्णन से यह भी समझते हैं कि भगवान चैतन्य महाप्रभु द्वारा सन्यास ग्रहण करने के पश्चात, श्रीवास पण्डित ने सम्भवतः अलगाव की भावना के कारण, नवद्वीप को छोड़ दिया, और कुमारहट्टा में रहने लगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)