नरहरि दास सरकार एक बहुत प्रसिद्ध भक्त थे। श्री चैतन्य-मंगल के प्रसिद्ध लेखक लोचन दास ठाकुर उनके शिष्य थे। चैतन्य-मंगल में कहा गया है कि श्री गदाधर दास और नरहरि सरकार श्री चैतन्य महाप्रभु को अत्यंत प्रिय थे, लेकिन श्रीखंड गाँव के निवासियों के संबंध में कोई विशिष्ट विवरण नहीं है।
चिरंजीव और सुलोचना दोनों श्रीखंड के निवासी थे, जहाँ उनके वंशज अभी भी रह रहे हैं। चिरंजीव के दो बेटों में से बड़े, रामचंद्र कविराज, श्रीनिवास आचार्य के शिष्य और नरेंद्रनाथ दास ठाकुर के अंतरंग सहयोगी थे। छोटा बेटा गोविंद दास कविराज, प्रसिद्ध वैष्णव कवि थे। चिरंजीव की पत्नी सुनंदा थी और उनके ससुर का नाम दामोदर सेन कविराज था। चिरंजीव पहले गंगा नदी के तट पर, कुमारनगर गाँव में रहते थे। गौर-गणोद्देश-दीपिका (207) में कहा गया है कि वह पहले वृंदावन में चंद्रिका थे।
