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अनुवाद
इकतीसवीं शाखा जगदीश पंडित थे, और बत्तीसवीं शाखा हिरण्य महाशय थे, जिन पर भगवान चैतन्य ने बचपन में अपनी अहैतुकी कृपा दिखाई थी।
The thirty-first branch was Jagadish Pandit and the thirty-second branch was Hiranya Mahashay, on whom Mahaprabhu had shown causeless mercy in his childhood.
तात्पर्य
जगदीश पंडित पहले कृष्ण-लीला में एक महान नर्तक थे और चंद्रहास के नाम से जाने जाते थे। हिरण्य पंडित के बारे में कहा जाता है कि एक बार जब भगवान नित्यानंद, मूल्यवान आभूषणों से सजे हुए, उनके घर पर ठहरे हुए थे, तो पूरी रात एक बड़े चोर ने इन आभूषणों को लूटने का प्रयास किया लेकिन असफल रहा। बाद में वह नित्यानंद प्रभु के पास आया और उनको आत्मसमर्पण कर दिया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥