चिकित्सा करेन यारे हइया सदय ।
देह - रोग भाव - रोग, - दुइ तार क्षय ॥51॥
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अनुवाद
जैसे ही मुरारी गुप्त ने अपने रोगियों का इलाज किया, उनकी दया से उनके शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों रोग शांत हो गए।
When Murari Gupta treated his patients, by his grace both the physical and spiritual diseases of the patients were reduced.
तात्पर्य
मुरारी गुप्ता शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की बीमारियों का इलाज कर सकते थे क्योंकि वह पेशे से एक चिकित्सक थे और आध्यात्मिक उन्नति के मामले में भगवान के महान भक्त थे। यह मानवता की सेवा का एक उदाहरण है। सभी को यह जानना चाहिए कि मानव समाज में दो प्रकार की बीमारियाँ होती हैं। एक बीमारी, जिसे अध्यात्मिक या भौतिक रोग कहा जाता है, शरीर से संबंधित होती है, लेकिन मुख्य बीमारी आध्यात्मिक होती है। जीवित इकाई शाश्वत है, लेकिन किसी न किसी तरह, जब भौतिक ऊर्जा के संपर्क में आता है, तो उसे जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और रोग की पुनरावृत्ति के अधीन किया जाता है। आधुनिक समय के चिकित्सकों को मुरारी गुप्ता से सीखना चाहिए। यद्यपि आधुनिक परोपकारी चिकित्सक विशाल अस्पताल खोलते हैं, लेकिन आत्मा की भौतिक बीमारी का इलाज करने के लिए कोई अस्पताल नहीं हैं। कृष्ण चेतना आंदोलन ने इस बीमारी को ठीक करने का बीड़ा उठाया है, लेकिन लोग इसकी बहुत अधिक सराहना नहीं करते क्योंकि उन्हें नहीं पता कि यह बीमारी क्या है। एक रोगी व्यक्ति को उचित दवा और उचित आहार दोनों की आवश्यकता होती है, और इसलिए कृष्ण चेतना आंदोलन भौतिक रूप से त्रस्त लोगों को पवित्र नाम के जप, या हरे कृष्ण महा-मंत्र की दवा और प्रसाद के आहार की आपूर्ति करता है। शारीरिक बीमारियों को ठीक करने के लिए कई अस्पताल और चिकित्सा क्लीनिक हैं, लेकिन आत्मा की भौतिक बीमारी को ठीक करने के लिए ऐसे कोई अस्पताल नहीं हैं। कृष्ण चेतना आंदोलन के केंद्र एकमात्र स्थापित अस्पताल हैं जो मनुष्य को जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था और बीमारी से ठीक कर सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥