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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.10.39 
नन्दन - आचार्य - शाखा जगते विदित ।
लुकाइया दुइ प्रभुर याँर घरे स्थित ॥39॥
 
 
अनुवाद
नन्दन आचार्य, चैतन्य वृक्ष की सत्रहवीं शाखा, संसार में प्रसिद्ध हैं, क्योंकि दोनों प्रभु (भगवान चैतन्य और नित्यानंद) कभी-कभी उनके घर में छिप जाते थे।
 
Nandan Acharya, the seventeenth branch of the Chaitanya tree, is known to the world because both the Lords (Chaitanya Mahaprabhu and Nityananda Prabhu) used to hide in his house sometimes.
तात्पर्य
नन्दनाचार्य भगवान चैतन्य महाप्रभु के एक अन्य सहचर थे जो नवाद्वीप में उनके कीर्तन पर्व में शामिल हुए थे। श्रील नित्यानंद प्रभु अवधूत के रूप में कई तीर्थ यात्राओं पर निकले और जब वे पहली बार श्री नवाद्वीप-धाम आए तो वे नन्दनाचार्य के घर में छिपे रहे। यहीं पर उनकी भगवान चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों से पहली मुलाकात हुई। जब चैतन्य महाप्रभु ने अपना महा-प्रकाश प्रदर्शित किया, तो उन्होंने रामाई पाण्डित को आज्ञा दी कि वे नन्दनाचार्य के घर में छिपे हुए अद्वैत प्रभु को बुलाएँ क्योंकि श्री चैतन्य महाप्रभु समझ सकते थे कि वे छिपे हैं। इसी तरह, भगवान चैतन्य भी कभी-कभी नन्दनाचार्य के घर में छिप जाते थे। इस संदर्भ में कोई श्री चैतन्य-भागवत, मध्य-खण्ड, अध्याय छह और सत्रह का उल्लेख कर सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)