दण्ड - कथा कहिब आगे विस्तार करिया ।
दण्डे तुष्ट प्रभु ताँरे पाठाइला नदीया ॥32॥
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अनुवाद
आगे चलकर चैतन्यचरितामृत में मैं इस दण्ड की घटना का विस्तार से वर्णन करूँगा। इस दण्ड से अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान ने दामोदर पंडित को नवद्वीप भेजा।
I will describe this punishment later in the Chaitanya Charitamrita. Mahaprabhu was so pleased with this punishment that he sent Damodara Pandit to Navadvipa.
तात्पर्य
दामोदर पंडित, जो कि पहले वृज-धाम में शैब्या के नाम से विख्यात थे, भगवान चैतन्य के संदेशों को शचीमाता तक पहुंचाते थे और रथ-यात्रा के दौरान शचीमाता के संदेश भगवान चैतन्य महाप्रभु तक पहुंचाते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥